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माँ

  • Writer: thewritastic
    thewritastic
  • Sep 13, 2020
  • 1 min read

माँ इस शब्द मे तो सिर्फ एक अक्षर है,

पर माँ से प्यार मिलता भरकर है।

नौ महीने पाला है अपनी कोक मे,

और प्यार है उसकी रोक टोक मे।

सब आराम कर रहे है,

पर माँ काम कर रही है।

तेरी सेवा करना मेरा फ़र्ज़ है,

माँ तेरा मुझपे कर्ज़ है।


कभी हॅसाती है तो कभी रूलाती है,

माँ अपनी डाट मे भी प्यार जताती है।

प्यार क्या होता है एक माँ सिखाती है,

हमारा पेट भरकर खुद भूखी सोजाती है।

माँ तु मेरा स्वाभिमान है,

भगवान का दिया हुआ एक बड़ा वरदान है।

तेरी सेवा करना मेरा फ़र्ज़ है,

माँ तेरा मुझपे कर्ज़ है।


इस कविता का एक ही मीनिंग है,

माँ शब्द नही एक फीलिंग है।

लेखक,

आगम गोसालिया



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